सरकार द्वारा उद्योग जगत एवं किसान भाईयों के व्यापक हितों के दृष्टिगत लागू किये गये बहुप्रतीक्षित नये प्राविधानों से किसान भाईयों के साथ उद्योग जगत इतना उत्साहित है कि इसका धरातल पर प्रभाव आना प्रारम्भ हो गया है। अध्यादेश लागू होने पर चावल उद्योग से जुड़ी एक कम्पनी की कदाचित उत्तर प्रदेश की पहली निजी मण्डी जनपद- बुलन्दशहर की खुर्जा तहसील में मूर्तरुप ले रही है। जहां चावल मिलर्स/निर्यातकों द्वारा प्रतिस्पर्धात्मक मूल्यों पर सीधे किसानों से धान की खरीद कराये जाने की योजना है। इसका विस्तृत विवरण संलग्न पम्पलेट में दिया गया है।
(Private Auction Yard)
First ever in the state of UTTAR PRADESH at:
VILLAGE: ARANIYA, TEHSIL: KHURJA
DISTT. BULANDSHAR (U.P) 203131
Our main aim is to educate the farmers
to adopt the good Agriculture Practices (G.A.P.) with
regard to growing of BASMATI PADDY as well as ONE STOP
procurement facility to RICE MILLERS AND EXPORTERS.
विभिन्न प्रदेशों में स्थापित चावल मिलों की कच्चे माल के लिये निर्भरता अपने प्रदेश के साथ-साथ प्रदेश से बाहर अन्य राज्यों में उत्पादित धान पर भी रहती है। सम्पूर्ण देश में किसानों द्वारा जलवायु के अनुसार अलग-अलग समय पर धान उत्पादित किया जाता है। अब इन प्रदेशों से सीधे चावल मिलों द्वारा उपज अपने मिल पर मंगाने और मण्डी शुल्क की छूट भी होने से पूरे वर्ष भर आवश्यकतानुसार कच्चा माल मंगाकर अपना मिल साल भर चलाकर पूरी क्षमता का उपयोग किया जा सकेगा जिससे वर्ष भर श्रमिकों को रोजगार उपलबध हो सकेगा।
अतः भारत सरकार द्वारा जारी किये गये नये अध्यादेश के माध्यम से उपलब्ध करायी गयी सुविधाओं का लाभ ना केवल हमारे किसान भाईयों को होगा बल्कि हमारी मण्डियों से बाहर कार्यरत व्यापारियों, आढ़तियों, ग्रामीण मजदूरों एवं उद्योग को भी होगा। जिससे हम कृषि जिन्सों के निर्यात को बढाने, किसानों की आय दो गुनी करने एवं आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में सफल हो पायेंगे।
आजकल वैश्विक स्तर पर धीरे-धीरे सम्पूर्ण विश्व में खाद्य पदार्थो के सम्बन्ध में FOOD SAFETY AND QUALITY को लेकर बहुत अधिक जागरुकता फैल रही है।
हमारे देश में असंगठित रुप से गुणवत्ता रहित कीटनाशक दवाईयों का प्रयोग कर उत्पादित किये जा रहे धान से निर्मित चावल अधिकतर पश्चिमी देशों में स्वीकार नहीं किया जा रहा है जिसका सीधा नुकसान चावल मिल तथा किसानों के साथ-साथ हमारे देश की छवि को भी हो रहा है।
अब काण्ट्रैक्ट फार्मिंग के जरिये भारत से चावल निर्यात में सुविधा होगी। जिससे विदेशी मुद्रा अर्जन में वृद्धि तथा किसानों को अधिक मूल्य के साथ ही चावल उद्योग को बढावा एवं देश में रोजगार में वृद्धि के नये रास्ते खुलेंगे।
सरकार द्वारा देश के किसानों तथा कृषि आधारित उद्योगों की भलाई के लिए लागू किये गये काण्ट्रैक्ट फार्मिंग अध्यादेश से प्रभावित होकर हमारे संगठन के एक सदस्य मिलर द्वारा जनपद-अलीगढ़ की खैर तहसील में बासमती धान की काण्ट्रैक्ट फार्मिंग लगभग 5850 एकड़ में प्रारम्भ कर दी गई है जिसमें किसानों को उनके उपज का न्यूनतम भाव तय किया गया है। यह भी प्राविधान रखा है कि यदि उक्तानुसार तय किये गये न्यूनतम भाव से आसपास की मण्डियों में भाव अधिक रहेगा तो मिलर बाजार भाव पर किसान की उपज खरीदेगा। इसी के साथ—साथ किसान को रू0 100.00 प्रति कु0 का बोनस भी दिया जायेगा।